आज नासा के नए बॉस जेरेड इसाकमैन ने दुनिया को एक बड़ा सरप्राइज दिया है। अगर आप सोच रहे थे कि इंसान 2027 में चांद पर कदम रखने वाला है, तो रुकिए, प्लान पूरी तरह बदल गया है। नासा ने अपने महात्वाकांक्षी आर्टेमिस (Artemis) लूनर प्रोग्राम का पूरा नक्शा ही पलट कर रख दिया है।
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| आर्टेमिस मिशन 50 साल में पहली बार इंसानों को चांद पर वापस ले जाएगा |
अब आर्टेमिस III मिशन 2027 में चांद पर लैंड नहीं करेगा, बल्कि सिर्फ पृथ्वी की निचली कक्षा (Low-Earth orbit) में एक टेस्ट फ्लाइट बनकर रह जाएगा। यह एक समझदारी भरा कदम है, ताकि आगे के मिशन सुरक्षित हों। आखिरकार, जब आप 384,400 किलोमीटर से ज्यादा दूर जा रहे हों, तो शॉर्टकट लेना बेवकूफी है।
तकनीकी खराबी बनी बड़ी वजह
असल में ये पूरा ड्रामा शुरू हुआ 'आर्टेमिस II' मिशन की दिक्कतों से। चार अंतरिक्ष यात्रियों को चांद का चक्कर लगाने भेजने वाला ये मिशन अब कम से कम एक अप्रैल 2026 तक के लिए टल गया है।
वजह? एसएलएस (SLS) रॉकेट में हीलियम और हाइड्रोजन लीक जैसी गंभीर तकनीकी खराबियां सामने आई थीं। जब आप अरबों डॉलर का रॉकेट बना रहे हों, तो एक छोटा सा लीक भी पूरी टीम की रातों की नींद उड़ाने के लिए काफी होता है।
जेरेड इसाकमैन का साफ कहना है कि अपोलो मिशन की तरह हमें भी धीरे-धीरे और संभलकर कदम बढ़ाने होंगे। जल्दबाजी में अंतरिक्ष यात्रियों की जान का जोखिम बिल्कुल नहीं लिया जा सकता।
चांद पर लैंडिंग क्यों टली?
कई न्यूज़ चैनल आपको सिर्फ "देरी" का रोना रोएंगे, लेकिन असली बात यह है कि नासा के सेफ्टी पैनल ने रेड फ्लैग दिखा दिया था। एक ही बार में बहुत सारे नए काम करते हुए सीधे चांद पर लैंड करने में बहुत ज्यादा खतरा था। यह वैसा ही है जैसे बिना नेट प्रैक्टिस किए सीधे वर्ल्ड कप का फाइनल खेलना।
इसलिए 2027 के आर्टेमिस III में अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी के पास रहकर ही सिस्टम चेक करेंगे। उम्मीद है कि वे स्पेसएक्स और ब्लू ओरिजिन के कमर्शियल लैंडर्स के साथ 'डॉकिंग' की प्रैक्टिस भी करेंगे।
इसके साथ ही लाइफ सपोर्ट और कम्यूनिकेशन सिस्टम का भी लाइव चेकअप किया जाएगा। यह एक बेहद जरूरी सेफ्टी टेस्ट है जो असली लैंडिंग से पहले होना ही चाहिए।
आर्टेमिस मिशन के नए आंकड़े
• आर्टेमिस II: हीलियम और हाइड्रोजन लीक के चलते यह मिशन अब कम से कम एक अप्रैल 2026 के बाद ही लॉन्च होगा।
• आर्टेमिस III: 2027 में यह चांद पर नहीं उतरेगा, बल्कि पृथ्वी की कक्षा में डॉकिंग और सिस्टम टेस्टिंग करेगा।
• मून लैंडिंग: आर्टेमिस IV और V के जरिए नासा 2028 में दो बार चांद पर उतरने की आक्रामक तैयारी में है।
• रॉकेट अपग्रेड रद्द: नासा अब एसएलएस रॉकेट के अपर स्टेज अपग्रेड को रद्द कर रहा है, ताकि पुराने डिज़ाइन को ही स्टैंडर्ड बनाकर काम तेज़ किया जा सके।
मस्क और बेजोस की अहम भूमिका
जो बात बाकी रिपोर्ट्स मिस कर रही हैं, वो है नासा की नई कमर्शियल स्ट्रेटेजी। नासा अब स्पेसएक्स (SpaceX) और ब्लू ओरिजिन (Blue Origin) के लैंडर्स के साथ मिलकर काम करने पर पूरा ज़ोर दे रहा है। आखिर सरकार और प्राइवेट कंपनियों की ये जुगलबंदी ही स्पेस रेस का नया फ्यूचर है।
रॉकेट के अपग्रेड को रद्द करना भी एक स्मार्ट मूव है। सीधी सी बात है, नए डिज़ाइन में उलझने के बजाय, जो रॉकेट काम कर रहा है उसी का प्रोडक्शन बढ़ाकर नासा अपनी टीम की स्पीड वापस हासिल करना चाहता है। बार-बार डिज़ाइन बदलने से सिर्फ देरी और कन्फ्यूजन ही बढ़ता है।
2028 और मार्स की बड़ी तैयारी
भले ही इंसान को चांद पर दोबारा चलते हुए देखने के लिए हमें दो साल और इंतज़ार करना पड़े, लेकिन यह देरी असल में भविष्य के लिए एक मजबूत नींव है। नासा का लक्ष्य अब 2028 में दो मून लैंडिंग करना है। इसके बाद हर साल कम से कम एक लैंडिंग का टार्गेट रखा गया है।
यह 'कोर्स करेक्शन' इसलिए भी ज़रूरी था क्योंकि हमें चांद पर सिर्फ झंडा गाड़कर वापस नहीं आना है, बल्कि वहां टिकना है। कक्षा में होने वाले ये डॉकिंग टेस्ट भविष्य में इंसानों को सुरक्षित रूप से मंगल ग्रह (Mars) तक ले जाने का असल रास्ता पक्का करेंगे। तो थोड़ा इंतज़ार कर लीजिए, क्योंकि जब वापसी होगी, तो वो बेहद धमाकेदार होगी।

