माउंट एटना की राख बनी इटली के किसानों के लिए वरदान

इटली के सिसिली में माउंट एटना (Mount Etna) से निकलने वाली ज्वालामुखीय राख, जिसे कभी एक जानलेवा श्राप माना जाता था, अब किसानों के लिए 'आसमान से गिरे तोहफे' में बदल गई है। यूरोप के सबसे ऊंचे और सक्रिय ज्वालामुखी के ढलानों पर बसे शहरों में किसान अब इसे फेंकने के बजाय एक शक्तिशाली प्राकृतिक खाद के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।

माउंट एटना से निकली ज्वालामुखीय राख ने इटली की मिट्टी को बनाया अधिक उपजाऊ।


यह ऐतिहासिक बदलाव सिर्फ कृषि नहीं, बल्कि आपदा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण का एक ऐसा मॉडल बन गया है, जिसने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

तबाही की राख, इटली का भविष्य

इटली के सिसिली में माउंट एटना (Mount Etna) से निकलने वाली ज्वालामुखीय राख, जिसे कभी एक जानलेवा श्राप माना जाता था, अब किसानों के लिए 'आसमान से गिरे तोहफे' में बदल गई है। यूरोप के सबसे ऊंचे और सक्रिय ज्वालामुखी के ढलानों पर बसे शहरों में किसान अब इसे फेंकने के बजाय एक शक्तिशाली प्राकृतिक खाद के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।

41 वर्षीय किसान का सफल प्रयोग

जियारे (Giarre) कस्बे के 41 वर्षीय उष्णकटिबंधीय और खट्टे फलों के उत्पादक एंड्रिया पासानिसी अपनी 100 हेक्टेयर (247 एकड़) ज़मीन पर इस कृषि क्रांति का नेतृत्व कर रहे हैं। पीढ़ियों से पासानिसी और उनके जैसे सैकड़ों किसानों ने आसमान से गिरती इस राख को केवल एक बड़ी मुसीबत के रूप में देखा था।

लेकिन अब पासानिसी इस प्राकृतिक संसाधन का सीधा फायदा उठा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया, "यह राख हमें कम रसायनों का उपयोग करने की अनुमति देती है, जिससे खाद डालना सस्ता और अधिक टिकाऊ हो जाता है, प्रकृति के संतुलन का सम्मान करते हुए बिना इसका दुरुपयोग किए। यह कृषि का भविष्य है।"

लिंगुआग्लोसा (38 किलोमीटर दूर) के दाख की बारी मालिक एमिलियो सियाका कहते हैं, "एटना की राख ज्वालामुखीय मिट्टी के लिए अतिरिक्त मूल्य है — हमारे उत्पादकों के लिए शाब्दिक रूप से आसमान से गिरा तोहफा।" सियाका के अनुसार, "इस अनोखे भूवैज्ञानिक संदर्भ में हमें ज्वालामुखीय मिट्टी की प्रकृति को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, बल्कि उसे अपनाना चाहिए और अपनी ताकत बनाना चाहिए।"

राख में आयरन, एल्युमीनियम, सिलिका

कैटेनिया विश्वविद्यालय के पर्यावरण इंजीनियरिंग प्रोफेसर और इस पांच वर्षीय प्रोजेक्ट के प्रमुख शोधकर्ता पाओलो रोक्कारो ने इस पुरानी भ्रांति को तोड़ा है। उन्होंने बताया, "2011 के बाद विस्फोटक घटनाओं में राख के भारी उत्सर्जन की तीव्रता बढ़ने के साथ इसे प्रबंधित करने का एक व्यवस्थित समाधान ढूंढना जरूरी हो गया।"

वैज्ञानिकों ने खुलासा किया कि एटना की राख में आयरन, एल्युमीनियम और सिलिका मौजूद है। जब इसे मिट्टी में मिलाया जाता है, तो यह एक उत्कृष्ट प्राकृतिक खाद के रूप में काम करती है जो अतिरिक्त पानी को निकालने में मदद करती है।

रोक्कारो के अनुसार राख को कचरे के रूप में निपटाने में €300 प्रति टन का खर्च आता है। लेकिन अगर उनके शोध के आधार पर इस राख का व्यावसायिक पुनर्चक्रण किया जाए, तो यह लागत गिरकर मात्र €30 प्रति टन रह जाएगी।

खौफनाक आंकड़े, फायदेमंद सच

• दैनिक तबाही: हर बड़े विस्फोट के साथ जियारे जैसे शहरों को औसतन 12,000 टन ज्वालामुखीय राख का सामना करना पड़ता है।

• प्रसार क्षमता: तेज़ हवाएं इस राख को 800 किलोमीटर (497 मील) दूर तक ले जा सकती हैं।

• कैटानिया का संकट: जुलाई 2024 में सिसिली के दूसरे सबसे बड़े शहर कैटानिया ने प्रतिदिन 17,000 टन राख दर्ज की, जिसे साफ करने में लगभग 10 सप्ताह लगे।

• वित्तीय प्रभाव: राख हटाने का €300 प्रति टन खर्च 2021 में कई सिसिलियन नगर पालिकाओं को दिवालियापन के कगार पर धकेल चुका था।

सर्कुलर इकॉनमी का असली युग

Pragmatika जैसे प्रतिद्वंद्वी न्यूज़ पोर्टल्स ने भी स्वीकार किया है कि इस ज्वालामुखीय मलबे का असली असर एक बहु-उद्योग 'सर्कुलर इकॉनमी' (Circular economy) के रूप में सामने आ रहा है। यह आपदा अब औद्योगिक सोने में बदल रही है।

वैज्ञानिक अब सड़क निर्माण, दीवारों के इंसुलेशन और अत्याधुनिक जल शुद्धिकरण प्रणालियों में इस राख का सफल परीक्षण कर रहे हैं। शोधकर्ताओं ने इस प्राकृतिक राख का उपयोग 3D प्रिंटिंग इंक (3D printing ink) बनाने के लिए भी किया है, जो निर्माण क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति है।

यूरोपीय कानून क्यों बने बाधा?

साल 2024 में राख प्रबंधन के लिए नए क्षेत्रीय दिशानिर्देश जारी होने के बावजूद, इसके व्यवस्थित पुनरुपयोग (Systemic reuse) को अभी भी कानूनी और नौकरशाही बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में, यूरोपीय पर्यावरण कानून के तहत इसे अक्सर 'अपशिष्ट' (Waste) माना जाता है।

सबसे बड़ी समस्या यह है कि इस राख को प्रोसेस करने वाली पंजीकृत कंपनियों की अभी तक कोई आधिकारिक सूची मौजूद नहीं है। जब तक ये कानूनी बाधाएं दूर नहीं होतीं, पासानिसी और सियाका जैसे किसान व्यक्तिगत स्तर पर इस जादुई राख से दुनिया को टिकाऊ खेती का पाठ पढ़ाते रहेंगे।

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