सऊदी अरब के नेफूद (Nefud) रेगिस्तान की सूखी रेत के बीच वैज्ञानिकों को 115,000 साल पुराने इंसानी पैरों के निशान मिले हैं। यह एक ऐसी जगह है, जिसे आज किसी भी इंसान या बड़े जानवर के लिए 'असंभव' माना जाता है।
![]() |
| प्राचीन मानव के पैरों के निशान का जीवाश्म Credit: Waltkopp/Getty Images |
इस ऐतिहासिक खोज ने साबित कर दिया है कि शुरुआती इंसानों (Homo sapiens) ने अफ्रीका से बाहर निकलने के लिए केवल तटीय रास्तों का ही नहीं, बल्कि सीधे अरब के मध्य भाग का भी सहारा लिया था।
2017 की खुदाई और अलाथर झील की भव्यता
साल 2017 में मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने इस जगह की खुदाई की थी। अरबी भाषा में इस प्राचीन सूखी झील को 'अलाथर' (Alathar) यानी 'निशान' कहा जाता है।
हैरानी की बात यह है कि इस सूखी झील के तल पर केवल इंसानों के ही नहीं, बल्कि सैकड़ों अन्य विशाल जानवरों के पैरों के निशान भी पूरी तरह सुरक्षित मिले हैं।
376 पदचिह्न और विशाल जीवों का संगम
वैज्ञानिकों ने यहां कुल 376 पदचिह्नों का पता लगाया है। प्रमुख शोधकर्ता मैथ्यू स्टीवर्ट ने बताया, “जैसे ही हमें एक निशान दिखा, हम सभी निशानों को देख पाए।”
इन सात इंसानी पदचिह्नों में से चार एक ही जगह (क्लस्टर) में थे। इससे पता चलता है कि शायद मात्र दो या तीन लोग एक साथ दक्षिण दिशा की ओर जा रहे थे। पैरों की लंबाई, आकार और बनावट बिल्कुल शुरुआती होमो सेपियन्स जैसी है। यह निएंडरथल जैसे छोटे-कद वाले होमिनिन से पूरी तरह अलग है, जो साबित करता है कि ये निशान हमारे ही पूर्वजों के हैं।
अलाथर झील के चौंकाने वाले सटीक आंकड़े
• कुल पदचिह्न: झील के तल पर जानवरों और इंसानों के कुल 376 स्पष्ट निशान मिले हैं।
• इंसानी मौजूदगी: इन 376 निशानों में से सात निशान होमो सेपियन्स (इंसानों) के हैं।
• विशाल जानवर: यहां 44 हाथियों के और 107 प्राचीन ऊंटों के निशान भी दर्ज किए गए।
• कोई हथियार नहीं: खुदाई स्थल पर पत्थर का एक भी औजार नहीं मिला। यह साफ करता है कि इंसान यहाँ केवल पानी पीने के लिए रुके थे।
ग्रीन अरेबिया': जब रेगिस्तान था हरा-भरा
आखिर इतने विशाल जानवर और इंसान इस मौत के रेगिस्तान में क्या कर रहे थे? इसका जवाब 'ग्रीन अरेबिया' (Green Arabia) नाम के एक प्राचीन जलवायु बदलाव में छिपा है।
शोधकर्ता माइकल पेट्राग्लिया बताते हैं कि 115,000 साल पहले भारी मानसूनी बारिश ने इस पूरे रेगिस्तान को अफ्रीका के सेरेन्गेटी (Serengeti) जैसे हरे-भरे घास के मैदानों और मीठे झीलों में बदल दिया था। यही वह हरा-भरा और सुरक्षित रास्ता था जिसने शुरुआती इंसानों को अफ्रीका से बाहर यूरेशिया की ओर बढ़ने में मदद की।
डेटिंग तकनीक और पानी का अस्थायी पड़ाव
निशानों की सही उम्र का पता लगाने के लिए वैज्ञानिकों ने 'ऑप्टिकली स्टिमुलेटेड ल्यूमिनसेंस' (OSL) डेटिंग का इस्तेमाल किया। यह तकनीक बताती है कि रेत के किसी कण पर आखिरी बार सूरज की रोशनी कब पड़ी थी।
चूंकि वहां शिकार या हथियारों का कोई नामोनिशान नहीं मिला, इसलिए वैज्ञानिकों का मानना है कि इंसान केवल पानी पीकर आगे बढ़ गए थे। बाद में जब यह झील सूख गई, तो उड़कर आई रेत ने इन निशानों को हमेशा के लिए ढक कर सुरक्षित कर दिया।
अफ्रीका से पलायन का नया और गहरा अध्याय
हज़ारों सालों बाद हवा के कटाव ने ऊपर की रेत को हटा दिया, जिससे ये निशान आज की दुनिया के सामने फिर से उभर आए हैं।
यह खोज इस बात का पुख्ता सबूत है कि जलवायु परिवर्तन ने हमारे पूर्वजों को दुनिया भर में फैलने का सबसे बड़ा मौका दिया था। भविष्य में अरब प्रायद्वीप की ऐसी प्राचीन झीलों में होने वाली खुदाई, मानव इतिहास और हमारे पलायन के कई और गहरे राज़ खोल सकती है।

