मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच तेल बाज़ार एक बार फिर अनिश्चितता के दौर में प्रवेश कर चुका है। हाल के दिनों में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अपने तेल उत्पादन में कटौती की है, जबकि ईरान ने खाड़ी क्षेत्र से तेल आपूर्ति को रोकने की चेतावनी दी है। इस घटनाक्रम ने दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों में हलचल पैदा कर दी है।
रिपोर्टों के अनुसार, UAE ने प्रतिदिन लगभग 5 से 8 लाख बैरल तक उत्पादन कम किया है, जबकि क्षेत्र के अन्य देश भी आपूर्ति को लेकर दबाव महसूस कर रहे हैं। खाड़ी क्षेत्र का अहम समुद्री रास्ता Strait of Hormuz दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां तनाव बढ़ने से वैश्विक आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संकट लंबा खिंचता है, तो दुनिया के कई देशों में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है। हाल के दिनों में तेल की कीमतों में तेज उछाल भी इसी आशंका का संकेत है।
इस पूरे घटनाक्रम को समझना जरूरी है क्योंकि इसका असर केवल खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रहेगा। भारत समेत कई बड़े आयातक देशों की अर्थव्यवस्था भी इससे प्रभावित हो सकती है
